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चलो किसी ने तो इन पशुओं के लिए सोचा

@Vishal Rajput

लॉकडॉउन से अधिकांश लोग खुद ही अपने घरों में लॉक होकर रह गए हैं । यहां तक मार्केट से लेकर पार्कों में सिर्फ परिंदे ही दिख रहे हैं। ऐसे में जो आवारा बंदर, कुत्ता ,गाय इत्यादि आवारा पशु अपने पेट की भूख को शांत करने के लिए लोगों के झुठन पर तो किसी खाना परोसने वाले पर आश्रित रहते थे। उनके लिए एनजीओ आगे आ रही है, जिनमें से एक पिपल फॉर एनिमल्स ट्रस्ट भी है। जो लॉक डाउन के दौरान आवारा पशुओं को पर्याप्त मात्रा में भोजन करवा पुण्य का कार्य कर रही है। अक्सर ये लावारिस पशु होटलों और ढाबों से निकले खाने के उपर निर्भर रहते थे लेकिन शहर में बंदी के कारण ढाबा तो छोड़िए चाय की दुकान भी नहीं खुल रही ।लेकिन शायद इनकी गुहार समाज में रहने वाले कुछ सामाजिक लोगों ने सुन ली जिस वजह से आज स्टेशन पर रहने वाले बंदर व आस पास दिखने वाले अन्य लावारिस पशुओं को खाना मिल गया ।इस परेशानी की घड़ी में हमें इंसानियत के साथ साथ इन बेजुबान जानवर का भी ख्याल रखना होगा ।


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