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दादी नानी की कहानियों में जो बात थी अब कहीं नही

@Deepika gaur

अपने दादा-दादी के साथ गुजारे हुए पल, हमारी जिंदगी के सबसे यादगार पलों में से एक होते है। दादा-दादी या नाना-नानी का होना बच्चे के बचपन को सुखद बनाने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे बच्चे, जो अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रहते हैं, उनमें एक अलग तरीके की समझ और एक खास किस्म की संवेदनाएं होती हैं। ऐसे बच्चे हमशा खुश, मिलनसार और चीजों को बांटकर इस्तेमाल करने वाले होते हैं। इनमें परिवार में रहने और सभी की भावनाओं की कद्र करने की खास कला होती है। पर आज जिस तरह शहर बढ़ रहा है और हमारे कमरे छोटे पड़ रहे हैं, लोग अकेले हो रहे हैं। सब अपनी एक छोटी सी फैमिली में रहते हैं, जिनमें दादा-दादी या नाना-नानी महमान बन कर रह जाते हैं। पर आपको पता है कि सांइस के अनुसार-आपको अपने बच्चों को अपने मां-बाप के साथ ही रखना चाहिए। साइंस की मानें, तो जो बच्चे अपने दादा-दादी या नाना- नानी के साथ रहते हैं, वो बाकी अकेले रहने वाले बच्चों से काफी अलग होते हैं।

बच्चे रहते हैं खुश और सुरक्षित
जॉब पर जाने वाले मां-बाप या वर्किंग पैरेंट्स के लिए उनके मां-बाप का साथ रहना, उनके बच्चों की परवरिश के लिए पर्याप्त होता है। उन्हें बच्चों को पालने के लिए किसी दाई की जरूरत नहीं पड़ती। क्योंकि आपके पैरेंट्स आपके बच्चों की आपसे अच्छी देखभाल कर सकते हैं। गैन-पैरेंट्स सिर्फ बच्चों को पालने में ही मदद नहीं करते बल्कि इससे आपके बच्चों को सुरक्षा भी मिलती है। इसके अलावा आज के वक्त में जब आप अपने बच्चों को किसी के साथ अकेला नहीं छोड़ सकते, ऐसे में अपने मां-बाप पर आप आँख बंद करके भरोसा कर सकते हैं।

अपनी जड़ो के बारे में जानकर सीखते हैं कई गुण
जब बच्चे अपने परिवार के इतिहास के बारे में बहुत कुछ जानते हैं और अपने दादा दादी की भावनात्मक बातें समझा करते हैं, तो इस तरह बच्चों में किसी से भी जुड़ाव रखने की भावना को प्रबलता मिलती है। बच्चे न सिर्फ दादा-दादी के और करीब आ जाते हैं, बल्कि उनमें स्नेह, आदर और सेवा जैसे मानवीय गुण विकसित होते हैं। जिससे, बच्चे काफी लचीले और परिस्थिति अनुसार रहना सीख जाते हैं। साथ ही ऐसे बच्चों का दिमाग भी तेज होता है। वे दूसरों की तुलना में अधिक स्मार्ट और परिपक्व दिखाई देते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब वे अपने परिवार के इतिहास और कठिनाई के बारे में जानते हैं, तो वे उससे सीखते हैं कि कैसे मुश्किलों में भी आगे बढ़कर, अपनी लड़ाई लड़ी जाती है।


भावनात्मक तरीके से बनते हैं मजबूत 
जब बच्चे अपने दादा-दादी के साथ बहुत समय बिताते हैं, तो उनके पास किसी भी भावनात्मक या व्यवहार संबंधी परेशानियों से निपटने के लिए बेहतर समझ पैदा हो जाती है। आगे चलकर बड़े होने पर यही चीजें उन्हें किसी भी तरह के आघात का सामना करने में सक्षम बनाते हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि दादा-दादी के संपर्क में रहने वाले बच्चे अकेलेपन, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से कम पीड़ित होते हैं। वह हर तरीके से रहना सीख लेते हैं। उन्हें हर मुश्किल का हल निकालना आ जाता है।


सीखते हैं नैतिक गुण
मुख्य रूप से, माता-पिता का काम है कि वे अपने बच्चों में अच्छे संस्कार और नैतिकता पैदा करें। उन्हें सहानुभूति और दया सिखाएँ लेकिन दादा-दादी इस मामले में एक बड़ी मदद कर सकते हैं। दादा-दादी या नाना-नानी विश्वास, प्रेम और शुरुआती शिक्षा के स्तंभ के रूप में कार्य करते हुए। वे बच्चों को अच्छी कहानियां सुनाकर ही सिखा लेते हैं कि जीवन में कुछ चीजें क्यों जरूरी है। दादी-नानी की कहानियां बच्चों को ज्ञान देते हैं। ऐसे इन बच्चों के जीवन पर इन नैतिक कहानियों का अच्छा प्रभाव पडता है। आपका बच्चा अपने दादा-दादी से थोड़ी सी सीख, संस्कार और नैतिकता सीखकर एक सुंदर, समझदार और सम्मानित व्यक्ति के रूप में विकसित हो सकता है।

आपके मां-बाप भी रहेंगे खुश और सेहतमंद
गैन-पैरेंट्स का आपके बच्चों के साथ रहना न सिर्फ आपके बच्चे को खुश और स्वस्थ रखता है, ब्लकि यह आपके बूढ़े मां-बाप के लिए भी अच्छा है। आपके बच्चों के साथ रहकर आपके मां-बाप खुश रहते हैं। वह कभी अकेला महसूस नहीं करते और ना ही उन्हें खालीपन का अहसास होता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ माता-पिता डिप्रेशन और भूलने की बामारी आदि के शिकार हो जाते हैं। गौर करने की बात यह है कि यह सारी बीमारियां अकेलेपन और खाली होने से होती है। ऐसे में आपके बच्चों के साथ रहकर आपके मां-बाप खुश और स्वस्थ रह सकते हैं।


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