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अधिकारियों की बंदरबांट ले डूब रही हैं सूरजकुंड मेले को : आमजन से दूर हुआ मेला

@Deepika gaur

सूरजकुंड मेले के विवाद खत्म होने का नाम नही ले रहा  । टूरिज्म विभाग के अधिकारी अपनी धाक जमाने के चक्कर मेें मेले का  सत्यानाश करने पर तुले है मेले में केबल अधिकारी का ही बोलबाला  है जिस कारण विधायक, मंत्री व नगर निगम के जनप्रतिनिधि  एंट्री पास के लिए इस अधिकारी के सामने गिडगिड़ाते दिखाई दे रहे हैं। दरअसल देखा जाए तो सूरजकुंड मेला अधिकारियों की जागीर बनकर रह गया है। आरोप है कि एक टूरिज्म अधिकारी ने मेले की भव्यता व सम्मानजनक स्थिति को जमीन में मिला दिया है। टॅूरिज्म विभाग के तमाम बड़े अधिकारी इसके  सामने बौने साबित हो रहे हैं। मेले में एंट्री पास को लेकर नगर निगम के एक जनप्रतिनिधि ने इस  टूरिज्म अधिकारी  का जमकर बैंड बजाया।  उक्त जनप्रतिनिधि ने बताया कि इस अधिकारी की वजह से यह मेला आम जन से दूर हो गया है। उन्होंने संदेह जताया कि यदि इस मेले के आयोजन में होने वाले खर्च की न्यायिक जांच करवाई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। उनका कहना है कि मेले में  जनप्रतिनिधियों को कोई सम्मान नहीं दिया जा रहा। विधायक, मंत्री, मेयर व पार्षदों को भी इस अधिकारी ने ठेंगे पर रखा हुआ है। यही वजह है कि सूरजकुंड मेला आम जनता की बजाए केवल अधिकारियों के लिए ऐशगाह बनकर रह गया है। 
इस जनप्रतिनिधि ने अपना नाम ना छापने की एवज में बताया कि उन्होंने इस टूरिज्म अधिकारी की जमकर क्लास ली है। तब उन्हें पता चला है कि टूरिज्म विभाग के बड़े अधिकारियों ने एंट्री पासों की जमकर बंदरबांट की है। इन अधिकारियों ने अपनी एक गोपनीय लिस्ट बनाई है और उन्हीं को एंट्री पास भेजे जा रहे हैं।  एक मंत्री  व विधायकों को भी एंट्री पास नहीं पहुंचाए जा रहे। सरकार में शामिल एक चेयरमैन ने भी कई बार उक्त अधिकारी को फोन कर अपने समर्थकों के लिए एंट्री पास मांगे। पंरतु उन्हें पास नहीं दिए गए, जिसके बाद चेयरमैन को अपनी बेइज्जती महसूस हुई। इसी प्रकार एक मंत्री भी अपने समर्थकों के लिए पास मांगने के लिए गिडगिड़ाते हुए देखे गए। इस तरह से यह मेला अधिकारियों की धरोहर बनकर रह गया है। 


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