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मोल्डबंद रोड, बाइपास रोड स्थित यूनिवर्सिल अस्पताल ने 85 वर्षीय मुन्ना का पैर कटने से बचाया।

@Anuj Sharma

मुन्ना गांव मोठुका का रहने वाला है। मुन्ना पिछले 30 सालों से एक या दो बिंडल बिड़ी के पिया करता था। धीरे-धीरे उसके दोनों पैरों में चलते वक्त दर्द महसूस होने लगा। जिसके लिए उसने कई अस्पतालों में चैकअप कराया जहां उसे बताया कि यह नस का दर्द है जो अपने आप ठीक हो जाएगा। पर उसे कोई फायदा नहीं हुआ और उसका पैर धीरे-धीरे नीचे से काला पडऩे लगा। इसके बाद वह विभिन्न अस्पतालें जैसे एम्स दिल्ली व फरीदाबाद के कई अस्पतालों में गया, जहां उसे बताया गया कि इसके लिए उसका पैर काटना पड़ेगा। फिर वह हड्डी रोग विशेषज्ञ सूर्या अस्पताल के डायरेक्टर सुरेश अरोड़ा के पास गया। डा. अरोड़ा ने एक बार यूनिर्वसिल अस्पताल के हृदय एवं नस रोग विशेषज्ञ डा. शैलेष जैन के पास भेजा। डा. शैलेष जैन ने अपनी जांच में पाया गया कि मरीज के घुटने के पास से रक्त वाहिनी बिल्कुल बंद हैं। ऐसी स्थिति में जब पैर नीचे से काला पड़ रहा है तो उनके सामने दो ही स्थितियां थीं कि या तो पैर नीचे से काटा जाए या रक्त वाहिनी को खुलने की कोशिश की जाए। डा. शैलेष जैन व उनकी टीम ने इंटरमिटेंट बलुन इनफिलेशन एंड स्टेम सैल थैरेपी से इलाज किया। आपरेशन के बाद मरीज के घुटने के नीचे तक रक्त बहाव अब खूब अच्छी तरह से हो रहा है। इनफिलेशन एंड स्टेम थैरेपी अभी प्रारंभिक दौर में है। इसका इस तरह के मरीजों में काफी अच्छा प्रभाव देखा गया है और इस तरह के मरीजों में जहां-जहां भी दर्द होता है इस थैरेपी से उन रक्त वाहिनियों को खोला जाता है। इस थैरेपी के तहत एक तार जिसके सिरे पर गुब्बारा लगा होता है और जहां-जहां दर्द होता है वहां गुब्बारा फुलाया जाता है जिससे नसों में रक्त का बहाव होने लगता है और दर्द से छुटकारा मिल जाता है।


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