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निर्भया के दोषियों को मौत का फरमान तारीख और समय तय : अब पड़ेगी मां के कलेजे को ठंडक

@Deepika gaur

 7 वर्ष पहले हुए दिल्ली के देश के चर्चित निर्भया कांड को शायद ही कोई अपने दिलो दिमाग से निकाल पाया हो और उस शर्मनाक और मानवता को तार-तार कर देने वाली घटना के बाद महिलाओं और बेटियों के अंदर दहशत का माहौल साफ तौर पर दिखाई देने लगा था इस निर्भया कांड के बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल में तो बंद कर दिया गया था लेकिन ऐसी घटना के बाद दोषियों को सजा के लिए शायद देशवासियों के मन में कहीं न कहीं चिंता की लकीरें जरूर दिखाई दे रही थी

16 दिसंबर 2012 को 23 साल की फिजियोथेरेपी छात्रा निर्भया अपने एक दोस्त के साथ फिल्म लाइफ ऑफ़ पाई देखने गई. रात साढ़े 9 बजे वो दिल्ली के मुनिरका में एक चार्टर बस में सवार हुई. बस में सवार ड्राइवर समेत 6 लोग दरअसल मौज-मस्ती के इरादे से निकले थे. उन्होंने चलती बस में निर्भया का गैंगरेप किया और उसके दोस्त की जमकर पिटाई की.

गैंगरेप के दौरान निर्भया के साथ जानवरों से भी बदतर बर्ताव किया.  अस्पताल में दो हफ्ते इलाज के बाद भी  निर्भया को बचाया नहीं जा सका. और आखिरकार 29 दिसंबर 2012 को उसकी मौत हो गयी थी.
इस मामले में निचली अदालत ने 10 सितंबर 2013 को फैसला सुनाया था. उसने 4 दोषियों मुकेश, विनय, पवन और अक्षय फांसी की सजा दी थी. . 13 मार्च 2014 को दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस सज़ा को बरकरार रखा था. इस मामले में कुल 6 आरोपी थे. एक आरोपी राम सिंह की मुकदमे के दौरान मौत हो गई थी. जबकि एक आरोपी नाबालिग था. और एक ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी

वही इस कांड से जुड़े हुए चारों आरोपियों को 16 दिसंबर 2019 को फांसी की सजा दी जानी थी लेकिन इनकी याचिका पर इस सजा को आगे बढ़ा दिया गया था और फैसला एक बार से कोर्ट में चला गया था 7 जनवरी 2019 इस कांड के लिए एक बार फिर से कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है और चारों आरोपियों के खिलाफ  कोर्ट ने फांसी की सजा मुकर्रर की है 22 जनवरी 2020 को सुबह 7:00 बजे निर्भया कांड से जुड़े हुए चारों आरोपियों को फांसी की सजा देने का कोर्ट ने फैसला सुनाया है लेकिन 14 दिन के समय में यह चारों आरोपी खुद को बचाने का प्रयास कर सकते हैं क्योंकि इन सभी ने अपने पास लाइफ बचाने का एक तरीका बचा रखा है


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