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सभी दावे हुए फैले, प्लास्टिक पॉलीथिन के प्रयोग पर नहीं लग पाई रोक

@Anuj Sharma

प्रशासन का दावा था कि प्लास्टिक पॉलीथिन पर्यावरण के साथ साथ मानव जाती एवं अन्य जन जीवन के लिए अत्यधिक हानिकारक होती है और प्लास्टिक पॉलीथिन का पुन: उपयोग भी नहीं किया जा सकता। इसलिए इन्हीं तथ्यों के आधार पर प्रशासन ने कदम उठाया था कि 2 अक्टूबर 2019 के बाद से प्लास्टिक पॉलीथिन को बैन कर दिया जाएगा और प्लास्टिक पॉलीथिन का उपयोग न करने के लिए लोगो को जागृत कर पर उन्हें जूट व कपड़े से बने थैले का अधिक उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया गया था। साथ ही कुछ दुकानदार जो प्रशासन के आदेश के बाद भी प्लास्टिक पॉलीथिन का उपयोग कर रहे थे दंड स्वरूप उनका चालान भी काटा गया था। लेकिन इतने सारे प्रयासों के बावजूद भी प्रशासन की प्लास्टिक पॉलीथिन को बैन करने की मुहिम रंग नहीं ला पाई और अभी भी बाजार में लोगो एवं वस्तु विक्रेताओं को आमतौर पर इन प्लास्टिक पॉलीथिन का उपयोग करते हुए देखा जा सकता है। नीचे दी गई तस्वीर ओल्ड फरीदाबाद सब्जी मंडी की है जिसमें फल विक्रेता को प्लास्टिक पॉलीथिन में ग्राहक को फल देते हुए देखा जा सकता है। अब सवाल ये उठता है कि जब प्रसाधन द्वारा प्लास्टिक पॉलीथिन को पूर्ण रूप से बैन करने का निर्णय लिया गया था तो प्लस्टिक पॉलीथिन बैन क्यों नहीं हुई और यदि पूर्ण रूप से बैन नहीं किया गया तो इस नियम के तहत केवल कुछ लोगो का ही चालान क्यों काटा गया। ये कुछ मुद्दे ऐसे है जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते है और साबित करते है कि सरकार की नीतियों को पूरा होता हुआ केवल कागजों में देखा जा सकता है वास्तविकता में नहीं। वहीं ओल्ड फरीदाबाद सब्जी मंडी में कुछ लोग ऐसे भी दिखे जो स्वयं से ही प्लास्टिक पॉलीथिन के स्थान पर कपड़े से बने थैले का प्रयोग कर रहे थे लेकिन दुकानदारों द्वारा प्रत्येक सामान को देने के लिए अलग अलग पॉलीथिन का ही प्रयोग किया जा रहा है।


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